खड़े होकर पानी क्यों नहीं पीना चाहिए? आयुर्वेद के अनुसार जानिये इधर!

खड़े होकर पानी क्यों नहीं पीना चाहिए? आयुर्वेद के अनुसार जानिये इधर!

ज्यादातर लोग कहीं न कहीं भागदौड़ में लगे रहते हैं। ऐसे में वे पानी भी खड़े होकर पीते हैं। खड़े होकर पानी पीने से सेहत को बहुत नुकसान पहुंचता है।

 
ऑक्सीन सप्लाई रुक जाती है-
खड़े होकर पानी पीने से फूड और विंड पाइप में होने वाली ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाती है। जिसका असर न केवल फेफड़ों पर बल्कि दिल पर भी पड़ता है। 

जोड़ों में दर्द की शुरुआत-
खड़े होकर पानी पीने की आदत की वजह से पानी का बहाव तेजी से आपके शरीर से होकर जोड़ों में जमा हो जाता है। जिसकी वजह से हड्डियों और जोड़ों पर बुरा असर पड़ता है। हड्डियों के जोड़ वाले हिस्से में तरल पदार्थ की कमी की वजह से जोड़ों में दर्द के साथ हड्डियां कमजोर होना शुरू हो जाती हैं। कमजोर हड्डियों के चलते व्यक्ति गठिया जैसी बीमारी से पीड़ित हो सकता है।

हर्निया की शिकायत-
खड़े होकर पानी पीने से पेट के निचले हिस्से की दीवारों पर दबाव बनता है, जिससे पेट के आसपास के अंगों को बहुत नुकसान पहुंचता है। इस बुरी आदत के चलते कई लोगों को हर्निया का शिकार होना पड़ता है।

किडनी पर असर-
जब कोई व्यक्ति खड़े होकर पानी पीता है, तो पानी बिना फिल्टर हुए निचले पेट की तरफ तेजी से बढ़ता है। जिसकी वजह से पानी में जमा अशुद्धियां पित्ताशय में जमा हो जाती हैं। जो किडनी के लिए बहुत हानिकारक होती हैं। 

प्यास नहीं बुझती-
खड़े होकर पानी पीने से भले ही पेट भर जाए लेकिन व्यक्ति की प्यास नहीं बुझती है। प्यास बुझाने के लिए बैठकर पानी के छोटे-छोटे घूंट पिएं। 

अपच की समस्या- 
व्यक्ति जब बैठकर पानी पीता है तो मसल्स और नर्वस सिस्टम रिलैक्स होती हैं और पानी आसानी से पच जाता है। जबकि खड़े होकर पानी पीने से अपच की समस्या पैदा होती है।

एसिड का स्तर कम नहीं होता-
खड़े होकर या जल्दी में पानी पीने से शरीर में एसिड का स्तर कम नहीं होता। इसलिए हमेशा पानी शांत बैठकर पीना चाहिए। 

आयुर्वेद के अनुसार व्यक्ति जिस पानी को पीने के लिए उपयोग करें उसका तापमान शरीर के तापमान से ठंडा नहीं होना चाहिए। गर्मियों में बाहर से आते ही फ्रिज का ठंडा पानी पीने से शरीर को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में व्यक्ति को हमेशा न ज्यादा ठंडा और न बर्फ वाला पानी पीना चाहिए। पीने के लिए हमेशा नॉर्मल पानी का ही उपयोग करें।